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बटला हाउस एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग पर प्रदर्शन

जौनपुर में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने सौंपा ज्ञापन, कहा- सच सामने नहीं आया

जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को 12:30 बजे राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओं ने बटला हाउस मुठभेड़ की 18वीं बरसी पर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह को सौंपा। यह प्रदर्शन जिलाध्यक्ष शाहिद अली खान के नेतृत्व में हुआ।

राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के जिलाध्यक्ष शाहिद अली खान ने बताया कि 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के बटला हाउस में एक मुठभेड़ हुई थी। इसमें दो मुस्लिम नौजवान आतिफ और साजिद के साथ एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी, जिसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने रचा था। इसका मकसद सरकार की छवि खराब होने से बचाना और मुस्लिम नौजवानों को फंसाना था। शाहिद अली खान ने कहा कि इस मामले में कई मुस्लिम नौजवानों को फंसाकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी गई।

इस कथित फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने आजमगढ़ से दिल्ली तक जोरदार प्रदर्शन किए थे। पार्टी आज भी न्यायिक जांच की मांग कर रही है। शाहिद अली ने बताया कि इस मांग को मुसलमानों के साथ-साथ देश के हर न्यायप्रिय नागरिक का समर्थन मिला।

पार्टी नेता हस्सान अहमद काशमी ने कहा कि इस मुठभेड़ के बाद कांग्रेस सरकार ने अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं किया। सीआरपीसी की धारा 176 के तहत, किसी भी पुलिस मुठभेड़ में मौत होने पर मजिस्ट्रेट जांच कराना अनिवार्य होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बटला हाउस मुठभेड़ मामले में शुरू से ही कानून का उल्लंघन किया गया। एक पुलिस अफसर और दो छात्रों की मौत हुई, लेकिन किसी भी सरकार ने इसकी जांच नहीं कराई। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने कहा कि वे तब तक न्यायिक जांच की मांग करते रहेंगे, जब तक सरकार इसे मान नहीं लेती।