Jaunpur news गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनी अंजुमन जाफ़रिया की कदीम शब्बेदारी, इमाम हुसैन की याद में छलके अश्क

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गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनी अंजुमन जाफ़रिया की कदीम शब्बेदारी, इमाम हुसैन की याद में छलके अश्क

जौनपुर। शीराज़-ए-हिंद की पहचान रही गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी मोहब्बत, भाईचारे और इंसानी यकजहती की रिवायत को एक बार फिर बुलंदी मिली, जब अंजुमन जाफ़रिया के ज़ेरे-ए-एहतिमाम स्थानीय कल्लू मरहूम के इमामबाड़े में कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में आयोजित कदीम तरही शब्बेदारी रविवार को अकीदत और एहतराम के साथ सम्पन्न हुई। शनिवार शाम से शुरू हुई इस शबबेदारी में मुल्क के विभिन्न हिस्सों से आए अकीदतमंदों ने नौहाख़्वानी, मातम और अश्कों के ज़रिये हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदान-ए-कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया।

शब्बेदारी की पहली मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना मेहर अब्बास रिज़वी ने कहा कि कर्बला का पैग़ाम किसी एक कौम या फिरके तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र, इंसाफ़, सच्चाई और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े होने का पैग़ाम है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी दुनिया को अम्न, मोहब्बत और इंसानी अख़लाक़ का रास्ता दिखाती रहेगी। मजलिस की सोज़ख़्वानी समर रज़ा और अफ़रोज़ रज़ा ने की।

अंतिम मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी ने वाक़े-ए-कर्बला के दर्दनाक मंज़र को बयान किया तो पूरा इमामबाड़ा ग़मगीन हो उठा और अकीदतमंदों की आंखें अश्कबार हो गईं। उन्होंने कहा कि समाज की तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी है कि लोग इल्म, ईमानदारी और इंसाफ़ को अहमियत दें तथा ऐसे रहनुमाओं का चुनाव करें जो इंसानियत और समाज की भलाई के लिए काम करें।

मजलिस के बाद शबीहे ताबूत बरामद हुआ, जिसके हमराह अंजुमन हैदरिया अब्दुल्लाहपुर (अम्बेडकर नगर), अंजुमन सज्जादिया कोपागंज (मऊ), अंजुमन कारवाने अज़ा जानसठ, अंजुमन रौनके अज़ा मुस्तफ़ाबाद, अंजुमन सज्जादिया जलालपुर सहित नगर की विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख़्वानी और मातम का नज़राना पेश किया। पूरे आयोजन के दौरान अज़ादारी के साथ-साथ आपसी मोहब्बत, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम के समापन पर अंजुमन जाफ़रिया के अध्यक्ष नजमुल हसन नजमी ने सभी अंजुमनों, मेहमानों और अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मोहब्बत, इंसानी यकजहती और आपसी एहतराम को मज़बूत करते हैं। संचालन ज़ाहिद कानपुरी, बिलाल हसनैन एवं मोहम्मद अब्बास ऋषभ ने किया।

इस अवसर पर नजमुल हसन नजमी, मीनू खान , मास्टर वसीम, शाहनवाज़ ख़ान, आफ़ताब, हसन अब्बास मोनू, चंदू, रेशब, मीनू, डॉ. राहिल, आरिज़ ज़ैदी, ताबिश ज़ैदी, बिका, सकलैन, अंजुम ख़ान, शकील ख़ान, लाडले ख़ान, अबूज़र ज़ैदी सहित हज़ारों की तादाद में इमाम हुसैन (अ.स.) के अकीदतमंद मौजूद रहे।

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