Jaunpur news तीर्थराज हास्पिटल में आईयूआई तकनीक का हुआ शुभारंभविश्व आईवीएफ दिवस

Share

तीर्थराज हास्पिटल में आईयूआई तकनीक का हुआ शुभारंभ
विश्व आईवीएफ दिवस
-​अब सूनी कोख में गूँजेगी किलकारी, बड़े शहरों के नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर
-महानगरों का नहीं लगाना होगा चक्कर, किफायती दर पर मिलेगा बांझपन का इलाज
यथार्थ टुडे, जौनपुर: ​हर वर्ष 25 जुलाई को मनाया जाने वाला ‘विश्व आईवीएफ दिवस’ चिकित्सा विज्ञान की उस ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है, जिसने निसंतान दंपतियों की जिंदगी में उम्मीद का नया सवेरा फैलाया। इसी खास अवसर पर जौनपुर के तीर्थराज हॉस्पिटल ने जिले के निसंतान दंपतियों को एक बड़ी सौगात दी है। शनिवार को अस्पताल में बांझपन निवारण के लिए अत्यंत कारगर और आधुनिक ‘आईयूआई’ (इंट्रायूटरिन इनसेमिनेशन) सुविधा का भव्य शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब पूर्वांचल के मरीजों को बनारस, लखनऊ या दिल्ली जैसे महानगरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
​शुभारंभ अवसर पर स्त्री एवं बांझपन रोग विशेषज्ञ डॉ. शिखा शुक्ला ने बताया कि आईयूआई एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है, जिसे आम भाषा में ‘कृत्रिम गर्भाधान’ कहा जाता है। उन्होंने इस तकनीक के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। डा. शिखा ने कहा कि विश्व आईवीएफ दिवस का मूल उद्देश्य ही निसंतानता से जूझ रहे परिवारों को सही इलाज उपलब्ध कराना है। अब यही आधुनिक इलाज जौनपुर में बड़े शहरों की तुलना में बेहद किफायती दरों पर संभव हो सकेगा। कार्यक्रम के दौरान डा. मुकेश शुक्ल, डा. अवनीश सिंह, डा. गौरव मौर्य, डा. तूलिका मौर्या, डा. शशांक श्रीवास्तव, प्रवीण तिवारी व दया शंकर गुप्त समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीलेश शुक्ल ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार जताया।
…………………….
​जानिए कैसे काम करती है आईयूआई तकनीक
​डा. शिखा ने प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक में अत्याधुनिक लैब के भीतर स्वस्थ शुक्राणुओं को प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद एक बेहद बारीक कैथेटर के जरिए उन्हें महिला के गर्भाशय में सीधे पहुँचाया जाता है, जिससे फर्टिलाइजेशन की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। अल्ट्रासाउंड से अंडों की परिपक्वता पर नजर रखते हुए सही ओव्यूलेशन टाइम पर यह प्रक्रिया की जाती है, जो कि पूरी तरह दर्द रहित होती है।
……………
​इन परिस्थितियों में वरदान है यह इलाज
​चिकित्सकों के अनुसार, पुरुषों में स्पर्म काउंट/गतिशीलता में हल्की कमी, महिलाओं में सर्वाइकल म्यूकस समस्या, ‘अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी’ तथा एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं में यह इलाज बेहद सफल साबित होता है। यदि इसके 3 से 6 चक्रों के बाद सफलता नहीं मिलती, तब मरीजों को आईवीएफ कराने की सलाह दी जाती है।

About Author