August 17, 2026

Jaunpur news इंसाफ का ‘दशक’: 15 साल बाद हत्यारों को 10-10 साल की बामशक्कत कैद

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इंसाफ का ‘दशक’: 15 साल बाद हत्यारों को 10-10 साल की बामशक्कत कैद

​जौनपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: दोषियों पर लगा जुर्माना मृतक की बेवा को मिलेगा
​जौनपुर।
कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय में भले ही देर हो, पर अंधेर नहीं होती। इसका जीवंत उदाहरण जौनपुर की अदालत में देखने को मिला। 15 साल पहले शराब के नशे में शुरू हुए एक मामूली विवाद में घर में घुसकर युवक की बेरहमी से हत्या करने वाले दो आरोपियों को आखिर उनके पापों की सजा मिल गई।

​अपर सत्र न्यायाधीश रूपाली सक्सेना की अदालत ने कलापुर गांव के चर्चित रामफेर हत्याकांड में आरोपी राममिलन और राकेश राजभर को गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों दोषियों पर 31-31 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी रकम मृतक की बेवा (पत्नी) मंजू देवी को दी जाए।

​क्या था मामला?
घटना 8 सितंबर 2011 की रात करीब 10:30 बजे की है। कलापुर स्थित शराब ठेके के पास नशे की हालत में वादी रामदयाल के बेटे रामफेर और पड़ोसी राममिलन के बीच विवाद हुआ था। बीच-बचाव करने आए पन्नालाल को भी डंडे से पीटा गया। इसके बाद रामफेर जान बचाकर अपने घर आ गया।

​घर में घुसकर हॉकी-डंडों से बरसाई थी मौत
नशे और रंजिश में अंधे हो चुके राममिलन, राकेश, प्रवीण और करिया ने रामफेर का पीछा नहीं छोड़ा। वे लाठी-डंडे और हॉकी लेकर रामफेर के घर में घुस गए। उन्होंने उसे खींचकर बाहर निकाला और अधमरा होने तक पीटा। पति को बचाने दौड़ी पत्नी मंजू देवी को हमलावरों ने उठाकर गड्ढे में फेंक दिया। बीच-बचाव करने आए ग्रामीणों (हरिहर और सेवालाल) को भी बेरहमी से पीटा गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रामफेर ने दम तोड़ दिया था।

​दो नाबालिगों की फाइल अलग:
मामले में शामिल दो अन्य आरोपी प्रवीण और करिया घटना के समय अवयस्क (नाबालिग) थे, जिसके कारण उनकी पत्रावली (फाइल) को मुख्य केस से अलग कर जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया है।

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