August 31, 2026

Jaunpur news एआरटीओ कार्यालय जौनपुर पर सवालों की बौछार,कथित रेट लिस्ट तक,जवाबदेही के घेरे में एआरटीओ और आरआई

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एआरटीओ कार्यालय जौनपुर पर सवालों की बौछार,कथित रेट लिस्ट तक,जवाबदेही के घेरे में एआरटीओ और आरआई

सी.पी.शुक्ल,पत्रकार
जौनपुर/ एआरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार उठ रहे सवालों ने एक बार फिर विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोपों के केंद्र में एआरटीओ और आरआई हैं। सवाल यह है कि आखिर वे कौन लोग हैं, जो दशकों से कार्यालय के आसपास ‘उपग्रह’ की तरह मंडराते दिखाई देते हैं और वाहन पंजीयन, फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस, टैक्स सहित विभिन्न कार्यों में लोगों की मदद के नाम पर सक्रिय रहते हैं?
सबसे बड़ा सवाल कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को लेकर है। क्या अंदर और बाहर की एक सप्ताह की फुटेज सार्वजनिक रूप से जांच के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है? यदि कार्यालय की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है तो ऐसी रिकॉर्डिंग से परहेज क्यों? इसी के साथ कार्यालय में नियमित रूप से दिखाई देने वाले लगभग 25 चेहरों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
इससे भी गंभीर आरोप कथित ‘रेट लिस्ट’ को लेकर हैं। लोगों के दावों के अनुसार सरकारी शुल्क के अतिरिक्त डंपर के पंजीयन पर ₹25 हजार, छोटी ट्रांसपोर्ट गाड़ियों पर ₹8 हजार तथा कुछ बड़े वाहनों के फिटनेस-पंजीयन के लिए ₹25 हजार तक अतिरिक्त रकम मांगे जाने की बात कही जा रही है। स्थायी लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए भी अलग-अलग रकम की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि यदि एआरटीओ कार्यालय में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनियमितता नहीं है तो विभाग के अधिकारियों और आरआई पर बार-बार ऐसे आरोप क्यों लगाए जाते हैं? क्या जिलाधिकारी या किसी उच्चाधिकारी का आकस्मिक निरीक्षण इन सवालों का निष्पक्ष उत्तर नहीं दे सकता?
‘जहां आग नहीं लगी, वहां धुआं कैसे?’—इसी सवाल के साथ अब निगाहें एआरटीओ और आरआई पर हैं कि वे सामने आकर इन आरोपों पर अपना स्पष्ट पक्ष कब रखते हैं।

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