Jaunpur news स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को जागरूक कर रहे अधिवक्ता विकास तिवारी

IMG-20261015-WA0015
Share

स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को जागरूक कर रहे अधिवक्ता विकास तिवारी

जौनपुर से वाराणसी और गोरखपुर तक प्रतिबंधित मांझे का कहर, लोगों की जान बचाने के लिए स्कूल-स्कूल चल रहा जनजागरूकता अभियान

जौनपुर। प्रतिबंधित कीलर मांझे से होने वाली दर्दनाक घटनाओं पर अंकुश लगाने और लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से जौनपुर के अधिवक्ता विकास तिवारी द्वारा स्कूल-स्कूल जाकर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को उन्होंने राममूर्ति इंटर कालेज, गोपालपुर गजना, विकास खण्ड धर्मापुर, जौनपुर पहुंचकर बच्चों को सुरक्षित पतंगबाजी के प्रति जागरूक किया और उन्हें प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल न करने का संकल्प दिलाया।
अभियान के दौरान बच्चों ने संकल्प लिया कि वे पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागे का प्रयोग करेंगे। यदि उन्हें अपने आसपास या बाजार में कोई दुकानदार प्रतिबंधित मांझा बेचता दिखाई देगा, तो वे अपने माता-पिता के माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना देंगे।

अधिवक्ता विकास तिवारी ने बच्चों को समझाया कि नायलॉन, चाइनीज, सिंथेटिक, नॉन-बायोडिग्रेडेबल, तात और सीसा लेपित मांझा केवल पतंग उड़ाने का धागा नहीं, बल्कि इंसानों और बेजुबान पक्षियों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा है। इसकी चपेट में आने से किसी राहगीर या दोपहिया वाहन चालक की जान जा सकती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी सुरक्षित पतंगबाजी के लिए प्रेरित करें।

जौनपुर में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से शिक्षक संदीप तिवारी और चिकित्सक डॉ. समीर हाशमी की मौत की घटनाओं ने जिले को झकझोर दिया था। वहीं, वाराणसी में भी प्रतिबंधित मांझे से गला कटने के कारण एक साड़ी कारोबारी की मौत की खबर सामने आई। गोरखपुर में रमेश कन्नौजिया की मांझे की चपेट में आने से हुई मौत ने इस खतरे की गंभीरता को फिर उजागर किया है। इन घटनाओं ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

अधिवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ केवल सरकारी आदेशों और प्रशासनिक कार्रवाई के भरोसे बैठना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसी उद्देश्य से वह लगातार विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि बच्चे अपने परिवारों और समाज तक सुरक्षित पतंगबाजी का संदेश पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की खुशियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि पतंगबाजी के नाम पर किसी परिवार की खुशियां उजड़ने से बचाना है। जब बच्चे जागरूक होंगे तो परिवार जागरूक होगा और परिवारों की जागरूकता से समाज में बदलाव आएगा।

विकास तिवारी ने विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ उनका अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक समाज में इसके खतरों के प्रति व्यापक जागरूकता नहीं आती और इसके इस्तेमाल पर प्रभावी रोक सुनिश्चित नहीं होती।

विकास तिवारी का कहना है कि पतंग उड़ाइए, खुशियां मनाइए, लेकिन केवल सूती धागे से। किसी की जिंदगी की कीमत पर मनोरंजन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उक्त अवसर पर अभय मिश्र,अजय राय, बृजेश यादव , अंकित यादव, शिवराज यादव , सूरज राय ,चन्द्रेश यादव आदि उपस्थित रहे।