Jaunpur news संघ की तिलक प्रभात शाखा ने मनाया गुरु पूर्णिमा उत्सव, स्वयंसेवकों ने दी गुरु दक्षिणा
जौनपुर में संघ की तिलक प्रभात शाखा ने मनाया गुरु पूर्णिमा उत्सव, स्वयंसेवकों ने दी गुरु दक्षिणा
टीडी कॉलेज के उमानाथ सिंह स्टेडियम में आयोजित हुआ कार्यक्रम, जिला प्रचारक अमरजीत ने भगवा ध्वज के महत्व पर डाला प्रकाश
जौनपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तिलक प्रभात शाखा की ओर से गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व तिलकधारी महाविद्यालय स्थित उमानाथ सिंह स्टेडियम में हर्षोल्लास व पूर्ण निष्ठा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों ने परम पवित्र भगवा ध्वज को प्रणाम कर अपनी गुरु दक्षिणा अर्पित की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जिला प्रचारक अमरजीत ने संघ के सिद्धांतों और गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘गुरु’ शब्द का मूल अर्थ अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का आलोक फैलाना है। वहीं ‘पूर्णिमा’ जीवन में गुरु के माध्यम से पूर्णता प्राप्त करने का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा केवल एक सामान्य पूजन का दिवस नहीं, बल्कि गुरु की चेतना और आदर्शों से जुड़कर स्वयं के जीवन को रूपांतरित करने का संकल्प लेने का अवसर है।
जिला प्रचारक ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्षभर में छः प्रमुख उत्सव मनाता है, जिनमें गुरु पूर्णिमा तीसरा प्रमुख उत्सव है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेद व्यास जी का प्राकट्य दिवस माना जाता है, इसलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है और तभी से यह गुरु पूजन की परंपरा निरंतर चली आ रही है।
संबोधन के दौरान उन्होंने संघ की अनूठी परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी किसी व्यक्ति विशेष को अपना गुरु स्वीकार नहीं किया, बल्कि परम पवित्र ‘भगवा ध्वज’ को ही अपना मार्गदर्शक और गुरु माना है। यह ध्वज हमारे पूर्वजों के त्याग, तपस्या और बलिदान का अमर साक्षी है। यह हमारे जीवन का मार्गदर्शन करने के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना और आत्मा का स्पंदन है।
भगवा रंग की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि उगते सूर्य की भांति भगवा रंग अंधकार को मिटाकर प्रकाश बिखेरता है। यह मनुष्य को आलस्य व मोह-माया से बाहर निकालकर धर्म और कर्तव्य पथ पर बढ़ने की प्रेरणा देता है। भगवा रंग निःस्वार्थ सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा, “यदि समस्त धरती को कागज और समुद्र को स्याही बना दिया जाए, तब भी गुरु के महान गुणों का वर्णन कर पाना संभव नहीं है।” इस अवसर पर शाखा के अनेक स्वयंसेवक अनुशासित गणवेश में उपस्थित रहे।
