Jaunpur news अपर परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश को वाराणसी मंडल के अधिकारियों द्वारा दिखाया जा रहा ठेंगा।

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अपर परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश को वाराणसी मंडल के अधिकारियों द्वारा दिखाया जा रहा ठेंगा।

अपर परिवहन आयुक्त ने वाराणसी मंडल के अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण,13 दिन बीतने के बाद भी जवाब हवा हवाई

जौनपुर। एआरटीओ कार्यालय जौनपुर में तैनात वरिष्ठ सहायक लिपिक गणेश दत्त मिश्रा के निलंबन प्रकरण में अब उच्चस्तरीय जांच और साक्ष्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अपर परिवहन आयुक्त (प्रशासन), उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के माध्यम से वाराणसी मंडल के संबंधित अधिकारियों को सात कार्यदिवस के भीतर निलंबन में प्रयुक्त साक्ष्य और आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

पत्र संख्या 3912 ई/2026-125 ई/2026 के अनुसार, उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ ने 24 अगस्त 2026 को प्रकरण में प्रत्यावेदन दिया था। इसमें आरोप लगाया गया कि गणेश दत्त मिश्रा को निलंबित करने से पहले पत्रावली का गहन परीक्षण नहीं किया गया और न ही संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुना गया।

प्रत्यावेदन में पांच वाहनों के पंजीयन से जुड़े मामले का उल्लेख है। इनमें दो वाहनों के लिए 18 अगस्त और तीन वाहनों के लिए 19 अगस्त 2026 को लखनऊ में बॉडी निर्माण के उद्देश्य से अस्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र जारी किए जाने की बात कही गई है। पत्र में इस बात पर सवाल उठाया गया कि वाहनों का भौतिक निरीक्षण किए जाने के बावजूद बॉडी निर्माण और वाहनों की वास्तविक स्थिति को लेकर किन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हुई।

अपर परिवहन आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से निलंबन के समर्थन में समस्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के साथ यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि निलंबन किन परिस्थितियों में आवश्यक था और क्या कार्रवाई विभागीय नियमों के अनुरूप की गई।
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, गणेश दत्त मिश्रा को कथित तौर पर लगभग 10 घंटे के भीतर निलंबित कर दिया गया था, जबकि उच्चाधिकारियों के निर्देश के बावजूद निर्धारित सात कार्यदिवस की अवधि बीतने के बाद भी जवाब उपलब्ध नहीं होने का दावा किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि निलंबन के आधार बने साक्ष्य क्या हैं और संबंधित अधिकारी अपना पक्ष कब प्रस्तुत करेंगे।
एक और बहुत महत्वपूर्ण बात है कि जिन अधिकारियों ने निलंबन की कार्रवाई मात्र 10 घंटे में पूर्ण कर ली इस निलंबन का जवाब देने के लिए दो महीने बाद मिले 7 दिन का समय क्यों कम पड़ गया और 13 दिन बीतने के बाद भी आज तक अपार परिवहन आयुक्त प्रशासन उत्तर प्रदेश सरकार को जवाब क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया।
इन तथ्यों पर विभागीय स्पष्टीकरण आने के बाद ही प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।